वो शोख शोख नज़र सांवली सी एक लड़की
वो शोख शोख नज़र सांवली सी एक लड़की
जो रोज़ मेरी गली से गुज़र के जाती है
सुना है
वो किसी लड़के से प्यार करती है
बहार हो के, तलाश-ए-बहार करती है
न कोई मेल न कोई लगाव है लेकिन न जाने क्यूँ
बस उसी वक़्त जब वो आती है
कुछ इंतिज़ार की आदत सी हो गई है
मुझे
एक अजनबी की ज़रूरत हो गई है मुझे
मेरे बरांडे के आगे यह फूस का छप्पर
गली के मोड पे खडा हुआ सा
एक पत्थर
वो एक झुकती हुई बदनुमा सी नीम की शाख
और उस पे जंगली कबूतर के घोंसले का निशाँ
यह सारी चीजें कि जैसे मुझी में शामिल हैं
मेरे दुखों में मेरी हर खुशी में शामिल हैं
मैं चाहता हूँ कि वो भी यूं ही गुज़रती रहे
अदा-ओ-नाज़ से लड़के को प्यार करती रहे
जो रोज़ मेरी गली से गुज़र के जाती है
सुना है
वो किसी लड़के से प्यार करती है
बहार हो के, तलाश-ए-बहार करती है
न कोई मेल न कोई लगाव है लेकिन न जाने क्यूँ
बस उसी वक़्त जब वो आती है
कुछ इंतिज़ार की आदत सी हो गई है
मुझे
एक अजनबी की ज़रूरत हो गई है मुझे
मेरे बरांडे के आगे यह फूस का छप्पर
गली के मोड पे खडा हुआ सा
एक पत्थर
वो एक झुकती हुई बदनुमा सी नीम की शाख
और उस पे जंगली कबूतर के घोंसले का निशाँ
यह सारी चीजें कि जैसे मुझी में शामिल हैं
मेरे दुखों में मेरी हर खुशी में शामिल हैं
मैं चाहता हूँ कि वो भी यूं ही गुज़रती रहे
अदा-ओ-नाज़ से लड़के को प्यार करती रहे
2.
होश वालों को ख़बर क्या बेख़ुदी क्या चीज़ है
होश वालों को ख़बर क्या बेख़ुदी क्या चीज़ है
इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िन्दगी क्या चीज़ है
उन से नज़रें क्या मिली रोशन फिजाएँ हो गईं
आज जाना प्यार की जादूगरी क्या चीज़ है
ख़ुलती ज़ुल्फ़ों ने सिखाई मौसमों को शायरी
झुकती आँखों ने बताया मयकशी क्या चीज़ है
हम लबों से कह न पाये उन से हाल-ए-दिल कभी
और वो समझे नहीं ये ख़ामोशी क्या चीज़ है
3.
हुआ सवेरा
हुआ सवेरा
ज़मीन पर फिर अदब
से आकाश
अपने सर को झुका रहा है
कि बच्चे स्कूल जा रहे हैं
नदी में स्नान करने सूरज
सुनारी मलमल की
पगड़ी बाँधे
सड़क किनारे
खड़ा हुआ मुस्कुरा रहा है
कि बच्चे स्कूल जा रहे हैं
हवाएँ सर-सब्ज़ डालियों में
दुआओं के गीत गा रही हैं
महकते फूलों की लोरियाँ
सोते रास्तों को जगा रही
घनेरा पीपल,
गली के कोने से हाथ अपने
हिला रहा है
कि बच्चे स्कूल जा रहे हैं
फ़रिश्ते निकले रोशनी के
हर एक रस्ता चमक रहा है
ये वक़्त वो है
ज़मीं का हर ज़र्रा
माँ के दिल सा धड़क रहा है
पुरानी इक छत पे वक़्त बैठा
कबूतरों को उड़ा रहा है
कि बच्चे स्कूल जा रहे हैं
बच्चे स्कूल जा रहे हैं
4.
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेरा
किससे पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ बरसों से
हर जगह ढूँढता फिरता है मुझे घर मेरा
एक से हो गए मौसमों के चेहरे सारे
मेरी आँखों से कहीं खो गया मंज़र मेरा
मुद्दतें बीत गईं ख़्वाब सुहाना देखे
जागता रहता है हर नींद में बिस्तर मेरा
आईना देखके निकला था मैं घर से बाहर
आज तक हाथ में महफ़ूज़ है पत्थर मेरा
5.
दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाये तो मिट्टी है खो जाये तो सोना है
अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है
बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है
ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ देर के साथी हैं
फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है
ये वक्त जो तेरा है, ये वक्त जो मेरा
हर गाम पर पहरा है, फिर भी इसे खोना है
आवारा मिज़ाजी ने फैला दिया आंगन को
आकाश की चादर है धरती का बिछौना है
6.
दिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती
दिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती
ख़ैरात में इतनी बङी दौलत नहीं मिलती
कुछ लोग यूँही शहर में हमसे भी ख़फा हैं
हर एक से अपनी भी तबीयत नहीं मिलती
देखा था जिसे मैंने कोई और था शायद
वो कौन है जिससे तेरी सूरत नहीं मिलती
हंसते हुए चेहरों से है बाज़ार कीज़ीनत
रोने को यहाँ वैसे भी फुरसत नहीं मिलती
7.
कुछ तबीयत ही मिली थी ऐसी
कुछ तबीयत ही मिली थी ऐसी
चैन से जीने की सूरत ना हुई
जिसको चाहा उसे अपना ना सके
जो मिला उससे मुहब्बत ना हुई
जिससे जब तक मिले दिल ही से मिले
दिल जो बदला तो फसाना बदला
ऱसम-ए-दुनिया की निभाने के लिए
हमसे रिश्तों की तिज़ारत ना हुई
दूर से था वो कई चेहरों में
पास से कोई भी वैसा ना लगा
बेवफ़ाई भी उसी का था चलन
फिर किसीसे ही श़िकायत ना हुई
व़क्त रूठा रहा बच्चे की तरह
राह में कोई खिलौना ना मिला
दोस्ती भी तो निभाई ना गई
दुश्मनी में भी अदावत ना हुई
8.
सब की पूजा एक सी अलग अलग हर रीत
सब की पूजा एक सी अलग अलग हर रीत
मस्जिद जाये मौलवी कोयल गाये गीत
पूजा घर में मूर्ती मीरा के संग श्याम
जितनी जिसकी चाकरी उतने उसके दाम
सीता रावण राम का करें विभाजन लोग
एक ही तन में देखिये तीनों का संजोग
मिट्टी से माटी मिले खो के सभी निशां
किस में कितना कौन है कैसे हो पहचान
9.
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीं तो कहीं आस्माँ नहीं मिलता
बुझा सका ह भला कौन वक़्त के शोले
ये ऐसी आग है जिसमें धुआँ नहीं मिलता
तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो
जहाँ उमीद हो सकी वहाँ नहीं मिलता
कहाँ चिराग़ जलायें कहाँ गुलाब रखें
छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता
ये क्या अज़ाब है सब अपने आप में गुम हैं
ज़बाँ मिली है मगर हमज़बाँ नहीं मिलता
चिराग़ जलते ही बीनाई बुझने लगती है
खुद अपने घर में ही घर का निशाँ नहीं मिलता
---------
आहिस्ता-आहिस्ता फिल्म में जो ग़ज़ल शामिल की गयी है ये वो है.
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीं तो कहीं आसमाँ नहीं मिलता
जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम है
ज़ुबाँ मिली है मगर हमज़ुबा नहीं मिलता
बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोले
ये ऐसी आग है जिस में धुआँ नहीं मिलता
तेरे जहान में ऐसा नहीं कि प्यार न हो
जहाँ उम्मीद हो इस की वहाँ नहीं मिलता
Nida Fazli Shayari
1.
Gham Sota Nahin
Jo Mila Khud Ko Dhundhta Hi Mila
Har Jagah Koi Dusra Hi Mila
Gham Nahi Sota Aadmi Ki Tarah
Neend Mein Bhi Ye Jaagta Hi Mila
Khud Se Hi Mil Ke Laut Aaye Hum
Humko Har Taraf Aaina Mila
Har Thkaan Ka Fareb Hai Manzil
Chalne Walon Ko Rasta Hi Mila
2.
Jab Se Mili Hai Zindagi
Pehle Bhi Jeete The Magar Jab Se Mili Hai Zindagi
Sidhi Nahi Hai Door Tak Uljhi Hai Zindagi
Ik Aankh Se Roti Hai Ye, Ik Aankh Se Hansti Hai Ye
Jaisi Dikhai De Jise Uski Vahi Hai Zindagi
Jo Paye Voh Khoye Use, Jo Khoye Voh Roye Use
Yoon To Sabhi Ke Paas Hai Kiski Hui Hai Zindagi
Har Raasta Anjaan Sa Har Falsafa Nadan Sa
Sadiyon Purani Hai Magar Har Din Nayi Hai Zindagi
Achi Bhali Thi Door Se, Jab Paas Aayi Kho Gayi
Jisme Na Aaye Kuch Nazar Voh Roshni Hai Zindagi
Mitti Hawa Lekar Udi Ghoomi Firi Vaapas Mudi
Kabron Pe Shilalekho Ki Tarah Likhi Hui Hai Zindagi
3.
Shahar Mein Tanha
Voh Bhi Meri Tarah Hi Shaher Mein Tanha Hoga
Roshni Khatam Na Kar Aage Andhera Hoga
Pyaas Jis Nehr Se Takrayi Vo Banjar Nikli
Jisko Piche Kahi Chor Aaye Vo Dariya Hoga
Ek Mehfil Mein Kayi Mehfilein Hoti Hain Shareek
Jisko Bhi Pass Se Dekhoge Akela Hoga
Mere Baare Mein Koi Raay To Hogi Uski
Usne Mujhko Bhi Kabhi Tor Ke Dekha Hoga
4.
Har Dastak Usaki Dastak
Darwaje Per Har Dastak Ka Jana Pehchana Chehra Hai
Roz Badlati Hain Taarikhen Waqat Magar Yun Hi Thehra Hai
Har Dastak Hai ‘Uski’ Dastak
Dil Yun Hi Dhoka Khata Hai
Jab Bhi Darwaja Khulta Hai Koi Aur Nazar Aata Hai
5.
Jab Tanhayian Bolti Hai
Deewar-O-Dar Se Utar Kar Perchaiyan Bolti Hain
Koi Nahi Bolta Jab Tanhaiyan Bolti Hain
Perdesh Ke Raaston Mein Rookte Kahan Hain Musafir
Har Ped Kehta Hai Kissa Khamoshiyan Bolti Hain
Ek Bar To Zindagi Mein Milti Hai Sabko Haqumat
Kuch Din To Har Aaine Mein Sehzadiyan Bolti Hain
Sun’ne Ki Mohlat Mile To Aawaz Hai Pathron Mein
Ujadi Hui Bastiyon Mein Aabadiyan Bolti Hain
6.
Jise Nigah Mili Usko Intezar Mila
Koi Pukar Raha Tha Khuli Fazaon Se
Jise Nigah Mili Usko Intezar Mila
Vo Koi Raah Ka Pathar Ho Ya Hanseen Manzar
Jahan Se Raasta Thehra Vahin Mazaar Mila
Har Ek Saans Na Jaane Thi Justjoo Kiski
Har Ek Ghar Musafir Ko Beghar Mila
Ye Shehar Hai Ki Numaish Lagi Hui Hai Koi
Jo Aadami Bhi Mila Banke Ishtihar Mila
होश वालों को ख़बर क्या बेख़ुदी क्या चीज़ है
इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िन्दगी क्या चीज़ है
उन से नज़रें क्या मिली रोशन फिजाएँ हो गईं
आज जाना प्यार की जादूगरी क्या चीज़ है
ख़ुलती ज़ुल्फ़ों ने सिखाई मौसमों को शायरी
झुकती आँखों ने बताया मयकशी क्या चीज़ है
हम लबों से कह न पाये उन से हाल-ए-दिल कभी
और वो समझे नहीं ये ख़ामोशी क्या चीज़ है
3.
हुआ सवेरा
हुआ सवेरा
ज़मीन पर फिर अदब
से आकाश
अपने सर को झुका रहा है
कि बच्चे स्कूल जा रहे हैं
नदी में स्नान करने सूरज
सुनारी मलमल की
पगड़ी बाँधे
सड़क किनारे
खड़ा हुआ मुस्कुरा रहा है
कि बच्चे स्कूल जा रहे हैं
हवाएँ सर-सब्ज़ डालियों में
दुआओं के गीत गा रही हैं
महकते फूलों की लोरियाँ
सोते रास्तों को जगा रही
घनेरा पीपल,
गली के कोने से हाथ अपने
हिला रहा है
कि बच्चे स्कूल जा रहे हैं
फ़रिश्ते निकले रोशनी के
हर एक रस्ता चमक रहा है
ये वक़्त वो है
ज़मीं का हर ज़र्रा
माँ के दिल सा धड़क रहा है
पुरानी इक छत पे वक़्त बैठा
कबूतरों को उड़ा रहा है
कि बच्चे स्कूल जा रहे हैं
बच्चे स्कूल जा रहे हैं
4.
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेरा
किससे पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ बरसों से
हर जगह ढूँढता फिरता है मुझे घर मेरा
एक से हो गए मौसमों के चेहरे सारे
मेरी आँखों से कहीं खो गया मंज़र मेरा
मुद्दतें बीत गईं ख़्वाब सुहाना देखे
जागता रहता है हर नींद में बिस्तर मेरा
आईना देखके निकला था मैं घर से बाहर
आज तक हाथ में महफ़ूज़ है पत्थर मेरा
5.
दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाये तो मिट्टी है खो जाये तो सोना है
अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है
बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है
ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ देर के साथी हैं
फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है
ये वक्त जो तेरा है, ये वक्त जो मेरा
हर गाम पर पहरा है, फिर भी इसे खोना है
आवारा मिज़ाजी ने फैला दिया आंगन को
आकाश की चादर है धरती का बिछौना है
6.
दिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती
दिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती
ख़ैरात में इतनी बङी दौलत नहीं मिलती
कुछ लोग यूँही शहर में हमसे भी ख़फा हैं
हर एक से अपनी भी तबीयत नहीं मिलती
देखा था जिसे मैंने कोई और था शायद
वो कौन है जिससे तेरी सूरत नहीं मिलती
हंसते हुए चेहरों से है बाज़ार कीज़ीनत
रोने को यहाँ वैसे भी फुरसत नहीं मिलती
7.
कुछ तबीयत ही मिली थी ऐसी
कुछ तबीयत ही मिली थी ऐसी
चैन से जीने की सूरत ना हुई
जिसको चाहा उसे अपना ना सके
जो मिला उससे मुहब्बत ना हुई
जिससे जब तक मिले दिल ही से मिले
दिल जो बदला तो फसाना बदला
ऱसम-ए-दुनिया की निभाने के लिए
हमसे रिश्तों की तिज़ारत ना हुई
दूर से था वो कई चेहरों में
पास से कोई भी वैसा ना लगा
बेवफ़ाई भी उसी का था चलन
फिर किसीसे ही श़िकायत ना हुई
व़क्त रूठा रहा बच्चे की तरह
राह में कोई खिलौना ना मिला
दोस्ती भी तो निभाई ना गई
दुश्मनी में भी अदावत ना हुई
8.
सब की पूजा एक सी अलग अलग हर रीत
सब की पूजा एक सी अलग अलग हर रीत
मस्जिद जाये मौलवी कोयल गाये गीत
पूजा घर में मूर्ती मीरा के संग श्याम
जितनी जिसकी चाकरी उतने उसके दाम
सीता रावण राम का करें विभाजन लोग
एक ही तन में देखिये तीनों का संजोग
मिट्टी से माटी मिले खो के सभी निशां
किस में कितना कौन है कैसे हो पहचान
9.
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीं तो कहीं आस्माँ नहीं मिलता
बुझा सका ह भला कौन वक़्त के शोले
ये ऐसी आग है जिसमें धुआँ नहीं मिलता
तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो
जहाँ उमीद हो सकी वहाँ नहीं मिलता
कहाँ चिराग़ जलायें कहाँ गुलाब रखें
छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता
ये क्या अज़ाब है सब अपने आप में गुम हैं
ज़बाँ मिली है मगर हमज़बाँ नहीं मिलता
चिराग़ जलते ही बीनाई बुझने लगती है
खुद अपने घर में ही घर का निशाँ नहीं मिलता
---------
आहिस्ता-आहिस्ता फिल्म में जो ग़ज़ल शामिल की गयी है ये वो है.
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीं तो कहीं आसमाँ नहीं मिलता
जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम है
ज़ुबाँ मिली है मगर हमज़ुबा नहीं मिलता
बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोले
ये ऐसी आग है जिस में धुआँ नहीं मिलता
तेरे जहान में ऐसा नहीं कि प्यार न हो
जहाँ उम्मीद हो इस की वहाँ नहीं मिलता
Nida Fazli Shayari
1.
Gham Sota Nahin
Jo Mila Khud Ko Dhundhta Hi Mila
Har Jagah Koi Dusra Hi Mila
Gham Nahi Sota Aadmi Ki Tarah
Neend Mein Bhi Ye Jaagta Hi Mila
Khud Se Hi Mil Ke Laut Aaye Hum
Humko Har Taraf Aaina Mila
Har Thkaan Ka Fareb Hai Manzil
Chalne Walon Ko Rasta Hi Mila
2.
Jab Se Mili Hai Zindagi
Pehle Bhi Jeete The Magar Jab Se Mili Hai Zindagi
Sidhi Nahi Hai Door Tak Uljhi Hai Zindagi
Ik Aankh Se Roti Hai Ye, Ik Aankh Se Hansti Hai Ye
Jaisi Dikhai De Jise Uski Vahi Hai Zindagi
Jo Paye Voh Khoye Use, Jo Khoye Voh Roye Use
Yoon To Sabhi Ke Paas Hai Kiski Hui Hai Zindagi
Har Raasta Anjaan Sa Har Falsafa Nadan Sa
Sadiyon Purani Hai Magar Har Din Nayi Hai Zindagi
Achi Bhali Thi Door Se, Jab Paas Aayi Kho Gayi
Jisme Na Aaye Kuch Nazar Voh Roshni Hai Zindagi
Mitti Hawa Lekar Udi Ghoomi Firi Vaapas Mudi
Kabron Pe Shilalekho Ki Tarah Likhi Hui Hai Zindagi
3.
Shahar Mein Tanha
Voh Bhi Meri Tarah Hi Shaher Mein Tanha Hoga
Roshni Khatam Na Kar Aage Andhera Hoga
Pyaas Jis Nehr Se Takrayi Vo Banjar Nikli
Jisko Piche Kahi Chor Aaye Vo Dariya Hoga
Ek Mehfil Mein Kayi Mehfilein Hoti Hain Shareek
Jisko Bhi Pass Se Dekhoge Akela Hoga
Mere Baare Mein Koi Raay To Hogi Uski
Usne Mujhko Bhi Kabhi Tor Ke Dekha Hoga
4.
Har Dastak Usaki Dastak
Darwaje Per Har Dastak Ka Jana Pehchana Chehra Hai
Roz Badlati Hain Taarikhen Waqat Magar Yun Hi Thehra Hai
Har Dastak Hai ‘Uski’ Dastak
Dil Yun Hi Dhoka Khata Hai
Jab Bhi Darwaja Khulta Hai Koi Aur Nazar Aata Hai
5.
Jab Tanhayian Bolti Hai
Deewar-O-Dar Se Utar Kar Perchaiyan Bolti Hain
Koi Nahi Bolta Jab Tanhaiyan Bolti Hain
Perdesh Ke Raaston Mein Rookte Kahan Hain Musafir
Har Ped Kehta Hai Kissa Khamoshiyan Bolti Hain
Ek Bar To Zindagi Mein Milti Hai Sabko Haqumat
Kuch Din To Har Aaine Mein Sehzadiyan Bolti Hain
Sun’ne Ki Mohlat Mile To Aawaz Hai Pathron Mein
Ujadi Hui Bastiyon Mein Aabadiyan Bolti Hain
6.
Jise Nigah Mili Usko Intezar Mila
Koi Pukar Raha Tha Khuli Fazaon Se
Jise Nigah Mili Usko Intezar Mila
Vo Koi Raah Ka Pathar Ho Ya Hanseen Manzar
Jahan Se Raasta Thehra Vahin Mazaar Mila
Har Ek Saans Na Jaane Thi Justjoo Kiski
Har Ek Ghar Musafir Ko Beghar Mila
Ye Shehar Hai Ki Numaish Lagi Hui Hai Koi
Jo Aadami Bhi Mila Banke Ishtihar Mila
Na Haara Hai Ishq Na Duniya Thaki Hai;
Diya Jal Raha Hai Hawa Chal Rahi Hai;
Sukoon Hi Sukoon Hai Khushi Hi Khushi Hai;
Tera Gham Salamat Mujhe Kya Kami Hai!
~ Khumar Barabankvi
Kisi Ranjish Ko Hawa Do Ke Mein Zinda Hoo Abhi;
Mujhe Koi Ahsaas Dila Do Ke Mein Zinda Hoon Abhi;
Mere Rukane Se Meri Saanse Bhi Ruk Jaayegi;
Fasale Aur Badha Do Ke Mein Zinda Hoon Abhi;
Zehar Peene Ki Toh Aadat Thi Zamanewalo;
Ab Koi Aur Dava Do Ke Mein Zinda Hoon Abhi;
Chalti Raho Mein Yuhi Aankh Lagi Hai 'Faakir';
Bheed Logo Ki Hata Do Ke Mein Zinda Hoon Abhi!
~ Sudarshan Faakir
Hans Ke Farmaate Hai Woh, Dekh Ke Haalat Meri;
Kyon Tum Aasaan Samajhte The Mohabbat Meri;
Baad Marne Ke Bhi Chhori Na Rafaaqat Meri;
Meri Turbat Se Lagi Baithi Hai Hasrat Meri!
~ Ameer Minai
उलझनों और कश्मकश में उम्मीद की ढाल लिए बैठा हूँ..
ए जिंदगी! तेरी हर चाल के लिए..मैं दो चाल लिए बैठा हूँ |
लुत्फ़ उठा रहा हूँ मैं भी आँख - मिचोली का ...मिलेगी कामयाबी, हौसला कमाल का लिए बैठा हूँ l
चल मान लिया.. दो-चार दिन नहीं मेरे मुताबिक...गिरेबान में अपने, ये सुनहरा साल लिए बैठा हूँ l
ये गहराइयां, ये लहरें, ये तूफां, तुम्हे मुबारक ...मुझे क्या फ़िक्र..,
.
.
.
.
. मैं कश्तीया और दोस्त... बेमिसाल लिए बैठा हूँ...
smile emoticon
Zindagi ki tapti dhoop mai ek thanda saya paya hai mai ne,
Jab kholi aankh to apni maa ko muskorata howa paya hai mai ne..
Jab bhi maa ka naam liya,
Os ka beshomaar pyar paya hai mai ne..
Jab koi dard mehsoos howa, jab koi mushkil aayi,
Apne pehlo mai apni maa ko paya hai mai ne..
Jaagti rahi who raat bhar mere liye,
Jaane kitni raatein, osay jagaya hai mai ne..
Zindagi ke har moadh(mor) par, jab howi gumrah mai,
Iski hidaayat par, pakarli seedhi raah mai ne..
Jis ki dua se har moseebat loat jaye,
Aisa farishta paya hai mai ne..
Meri har fiker ko janne wali,
Mere jazbaaton ko pehcanne wali,
Aisi hasti payi hai mai ne..
Meri zindagi sirf meri maa hai,
Isi ke liye to,
Is zindagi ki shama jala rakkhi hai mai ne
Jab kholi aankh to apni maa ko muskorata howa paya hai mai ne..
Jab bhi maa ka naam liya,
Os ka beshomaar pyar paya hai mai ne..
Jab koi dard mehsoos howa, jab koi mushkil aayi,
Apne pehlo mai apni maa ko paya hai mai ne..
Jaagti rahi who raat bhar mere liye,
Jaane kitni raatein, osay jagaya hai mai ne..
Zindagi ke har moadh(mor) par, jab howi gumrah mai,
Iski hidaayat par, pakarli seedhi raah mai ne..
Jis ki dua se har moseebat loat jaye,
Aisa farishta paya hai mai ne..
Meri har fiker ko janne wali,
Mere jazbaaton ko pehcanne wali,
Aisi hasti payi hai mai ne..
Meri zindagi sirf meri maa hai,
Isi ke liye to,
Is zindagi ki shama jala rakkhi hai mai ne

kyaa paaya humne duniya me aa kar,
lipte hue hain ghunaaho me hum, sisak rahi hai zindagi
kya huwa kyon hum bhul gaye Insaaniyat ko
Pahen liya hai farebon ka chola, sisak rahi hai zindagi
lipte hue hain ghunaaho me hum, sisak rahi hai zindagi
kya huwa kyon hum bhul gaye Insaaniyat ko
Pahen liya hai farebon ka chola, sisak rahi hai zindagi
Kyon tarpaate ho EHSAAS RUH ko apne
Wah bhechaari machal rahi hai, sisak rahi hai zindagi
Kuchh socho kuchh yaad karo bhul gaye ho jo FArz yaaron
Kuch to sudhaaro khudko yaaron, sisak rahi hai zindagi
Wah bhechaari machal rahi hai, sisak rahi hai zindagi
Kuchh socho kuchh yaad karo bhul gaye ho jo FArz yaaron
Kuch to sudhaaro khudko yaaron, sisak rahi hai zindagi
Bhaaeechara bechara ro raha hai
Khun beh rahi hai aankhon se uske, sisak rahi hai zindagi
Zekhm pe uske merhm to rakho,kuch to hoga tumhare paas
Talaash karo nange nahi ho insaniyat me tum, sisak rahi hai zindagi
Khun beh rahi hai aankhon se uske, sisak rahi hai zindagi
Zekhm pe uske merhm to rakho,kuch to hoga tumhare paas
Talaash karo nange nahi ho insaniyat me tum, sisak rahi hai zindagi
Dusron ko bharose kab tak rahoge EHSSAS
Khud ko bhi to tayyaar karo, sisak rahi hai zindagi
Aankhon se apne nafrat ko nikaalon,khud apni mishaal bano
baanton khusi ko apne, gham ki parwaah na kar, sisak rahi hai zindagi
Khud ko bhi to tayyaar karo, sisak rahi hai zindagi
Aankhon se apne nafrat ko nikaalon,khud apni mishaal bano
baanton khusi ko apne, gham ki parwaah na kar, sisak rahi hai zindagi
Tumhaari zarurat hai is duniya ko yaaron
Ro rahi hai bahut si aankhen, sisak rahi hai zindagi
Haanth barhaaon gaalon tak unke
Kuch unke yaar madadgaar gaar bano, sisak rahi hai zindagi
Ro rahi hai bahut si aankhen, sisak rahi hai zindagi
Haanth barhaaon gaalon tak unke
Kuch unke yaar madadgaar gaar bano, sisak rahi hai zindagi
Ek fariyaad hai is naacheej ki tumse
Nefrat chhoro aur pyaar karo, sisak rahi hai zindagi
Ro ro kar behaal hue jo kuchh unki parwaah karo
Kuchh nange hain talaash me tumhaare
kuch bhuke hain dhund rahe, sisak rahi hai zindagi...!!!
Nefrat chhoro aur pyaar karo, sisak rahi hai zindagi
Ro ro kar behaal hue jo kuchh unki parwaah karo
Kuchh nange hain talaash me tumhaare
kuch bhuke hain dhund rahe, sisak rahi hai zindagi...!!!

जिंदगी ...
कितनी बार लिख चूका हु तेरी कहानी
सुन चूका हु लोगो से तेरी जुबानी
हर वक्त तू बदल ही जाती है
कभी हिरा , कभी कांच हो जाती है
कभी पत्थर तो कभी नाजुक कली बन जाती है
हर वक्त लगता है
के मैंने पा लिया है तुझे
हर मोड़ पर रुक जाता हु
हताश होकर ...
जान जाता हु.. तुझे पाना
बहोत ही है कठिन ..
पर फिर से तू मुस्कुराती है
अपने बाहों में बुलाती है
और फिर से मै
तेरी और दौड़ने लगता हु..
छोटासा शिशु बनकर..
आज मेरा ये वादा है तुझसे
आज मै तुम्हे पाके ही रहूँगा
मेर नस नस में तुम्हे समाके ही रहूँगा
ऐ मेरी जिंदगी !
कितनी बार लिख चूका हु तेरी कहानी
सुन चूका हु लोगो से तेरी जुबानी
हर वक्त तू बदल ही जाती है
कभी हिरा , कभी कांच हो जाती है
कभी पत्थर तो कभी नाजुक कली बन जाती है
हर वक्त लगता है
के मैंने पा लिया है तुझे
हर मोड़ पर रुक जाता हु
हताश होकर ...
जान जाता हु.. तुझे पाना
बहोत ही है कठिन ..
पर फिर से तू मुस्कुराती है
अपने बाहों में बुलाती है
और फिर से मै
तेरी और दौड़ने लगता हु..
छोटासा शिशु बनकर..
आज मेरा ये वादा है तुझसे
आज मै तुम्हे पाके ही रहूँगा
मेर नस नस में तुम्हे समाके ही रहूँगा
ऐ मेरी जिंदगी !
मैं दो कदम चलता और एक पल को रूकता मगर,इस एक पल में जिन्दगी मुझसे 4 कदम आगे chali जाती,
मैं फिर दो कदम चलता और एक पल को रूकता मगर,
जिन्दगी मुझसे फिर ४ कदम आगे chali जाती,
जिन्दगी को jeet ta देख मैं muskurata और जिन्दगी मेरी mushkurahat पर hainran होती,
ये silsila yuhi चलता रहा ,
फिर एक दिन मुझको hasta देख एक sitare ने पुछा "तुम harkar भी muskurate हो
,क्या तुम्हे दुःख नहीं होता haar का?"तब मैंने कहा ,
मुझे पता है एक ऐसी sarhad aayegi jaha से जिन्दगी ४ तो क्या एक कदम भी आगे नहीं जा payegi
और तब जिन्दगी मेरा intzaar karegi
और मैं तब भी अपनी raftar से yuhi चलता रुकता
wahan pahunchunga .........एक पल ruk कर जिन्दगी की taraf देख कर muskuraoonga,
beete safar को एक नज़र देख अपने कदम फिर badhaoonga ,
ठीक usi पल मैं जिन्दगी से jeet jaunga,मैं अपनी haar पर muskuraya था
और अपनी jeet पर भी muskuraunga और जिन्दगी अपनी jeet पर भी न मुस्कुरा पाई थी
और अपनी haar पर भी न मुस्कुरा पायेगी ,
बस तभी मैं जिन्दगी को जीना सिखाऊँगा !!!!



