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Friday, May 14, 2010

मै कर के मोहब्बत को भुलाना भुल जाता हूँ


ज़रूरी काम है लेकिन रोज़ाना भुल जाता हूँ मुझे तुम से मोहब्बत है बताना भुल जाता हूँ !तेरी गलियो मे फिरना इतना अच्छा लगता है मै रास्ता याद रखता हूँ ठिकाना भुल जाता हूँ !!बस इतनी बात पर मै लोगो को अच्छा नही लगता मै नेकी कर तो देता हूँ जताना भुल जाता हूँ!
शरारत ले के आंखो मे वो तेरा देखना तौबा मै तेरी नज़रो पे जमी नज़रे झुकाना भुल जाता हूँ!!
मोहब्बत कब हुई कैसे हुई सब याद है मुझको मै कर के मोहब्बत को भुलाना भुल जाता हूँ!!!

4 Comments:

jasleen said...

This is very nice - are you the author?

Chanchal Singh said...

Yes i am the author of this blog.


Thanks for comment :)

sumant said...

Great and simply lovely

sonu raj said...

kyo payar kr ke bhul jaate hai log,bhich maihphil me akshar chhor jaate hai log.
na nibhana tha saath jab umar bhr ka.kyo daga deke dusro ko bewafa kah jate hai log.