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Friday, February 6, 2015

उलझनों और कश्मकश में उम्मीद की ढाल लिए बैठा हूँ..


उलझनों और कश्मकश में उम्मीद की ढाल लिए बैठा हूँ..
ए जिंदगी! तेरी हर चाल के लिए..मैं दो चाल लिए बैठा हूँ |
लुत्फ़ उठा रहा हूँ मैं भी आँख - मिचोली का ...मिलेगी कामयाबी, हौसला कमाल का लिए बैठा हूँ l
चल मान लिया.. दो-चार दिन नहीं मेरे मुताबिक...गिरेबान में अपने, ये सुनहरा साल लिए बैठा हूँ l
ये गहराइयां, ये लहरें, ये तूफां, तुम्हे मुबारक ...मुझे क्या फ़िक्र..,
.
.
.
.
. मैं कश्तीया और दोस्त... बेमिसाल लिए बैठा हूँ...
smile emoticon

2 Comments:

Beenit kumar said...

Rista wo nahi jisme
Attitude or Ego ho
Rista wo hai jisme
Ek ruthne Me Expert ho,


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Sajana Singh said...

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